मंगलवार, 3 मार्च 2020

राजस्थान विधानसभा में पेयजल, सिंचाई और लघु सिंचाई परियोजनाएं पारित

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में सोमवार को पेयजल, सिंचाई और लघु सिंचाई परियोजनाएं पारित हुई। शुद्ध पेयजल, सिचांई, नहरों और बांध के कई प्रस्तावों पर सदन में मुहर लगी। इंदिरा गांधी नहर परियोजना की मरम्मत के लिए 70 दिन तक जल आपूर्ति बाधित रहने की जानकारी भी सदन में मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने दी।

वहीं सदन में अनुदान मांगों पर बहस के जवाब में मंत्री बीडी कल्ला ने कहा कि आगामी दो माह में डिफ्लोराइजेशन के सभी सयंत्रों की जांच होगी, दो माह में सभी खराब आरओ, डिफ्लोराइजेशन सयंत्रों को ठीक किया जाएगा। विपक्ष ने जवाब को निराशजनक बताते कहा कि पूरा भार और जवाबदेही केंद्र के ऊपर डाली गई, राज्य सरकार के पास कोई प्लान नहीं था।

जलदाय मंत्री बीडी कल्ला ने सदन में जवाब पेश करते हुए कहा कि सब तक पेयजल पहुंचाया जाएगा, गर्मियों में पेयजल की किल्लत नहीं आने दी जाएगी। प्रदेश के सभी 222 शहरों में पेयजल परियोजनाओं से पानी मिल रहा है। राजस्थान सरकार 15 हजार लीटर तक मुफ्त पानी दे रही है। 29 शहरों में अमृत मिशन चल रहा है। हम परंपरागत जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। 


70 दिन की नहरबंदी में नहर की मरम्मत होगी

तमिलनाडू एक समय जल शून्य हो गया था, यह परियोजना 1 अप्रैल 2020 से योजना लागू होगी। 22 पंचायत समितियों के अतिदोहित 876 गांवों में जल स्तर उपर उठाने का काम होगा। शहरों की तर्ज पर गांवों में पेयजल उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है।4000 से कम आबादी के 200 से ज्यादा गांवों में पेयजल आपूर्ति की 625 करोड़ के प्रोजेक्ट चलेंगे। इंदिरा गांधी नहर फीडर की रिलाइनिंग होगी, 70 दिन की नहरबंदी में नहर की मरम्मत होगी, इसी महीने नहरबंदी शुरु होगी, 35 दिन का पानी रिजर्व रखें, सरहिंद फीडर से नहर में फिर पानी डाल दिया जाएगा, जिससे पीने का पानी मिलता रहे, फिर भी कमी रहेगी तो टैंकरों और कंटींजेंसी प्लान के तहत पेयजल उपवलब्ध करवाया जाएगा। अगले 50 साल तक नहर में दिक्कत होगी, नहर की मरम्मत से 16 से 17 हजार क्यूसेक पानी मिल सकेगी, अतिरिक्त पानी बहकर पाकिस्तान जाने की बात उठी। पाकिस्तान बहकर जाने वाले पानी को रोकने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।

क्या बोले प्रतिपक्ष के नेता

उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि पीएचईडी मंत्री का जवाब बेहद निराशाजनक है। विधानसभा में दिए जवाब में केंद्र पर जिम्मेदारी डाली गई है। राज्य सरकार अपनी योजनाओं का खाका नहीं पेश कर पाई. कई अहम योजनाओं के लिए बजट ही नहीं हैं। आने वाले दिनों में पानी की भारी किल्लत होगी।

18 बांधों के जीर्णोद्धार, नहरों की मरम्मत, पुरानी पेयजल लाइनों को बदलने, भूमिगत जल संचयन, केंद्र की योजनाओं को लागू करने, गांवों में पेयजल संसाधन बढ़ाने सहित कई अहम मसलों पर पेयजल मंत्री ने प्लान पेश किया। ईस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट पर भी केंद्र की मदद के लिए भाजपा नेताओं को भी साथ आकर केंद्र से मांग करने की बात मंत्री ने कही। पेयजल, सिंचाई और लघु सिंचाई परियोजनाएं पारित होने के साथ ही सदन की कार्रवाई स्थगित हुई।

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