शत्रुघ्न सिन्हा ने नरेंद्र मोदी, अमित शाह पर हमला बाेलते हुए कहा कि बीजेपी में उन्होंने लोक शाही को धीरे-धीरे तानाशाही में परिवर्तित होते देखा है।

भारतीय जनता पार्टी के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा आज औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। भाजपा नेतृत्व के साथ लंबे समय से नाराज चल रहे शत्रुघ्न सिन्हा दिल्ली में एक कार्यक्रम में कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। इस दौरान कांग्रेस की ओर से पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्तिसिंह गोहिल, पार्टी के वरिष्ठ नेता के सी वेणुगोपाल मौजूद थे।
इस दौरान पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि बेबाक राय रखने वाले शत्रुघ्न सिन्हा गलत पार्टी में थे। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस की विचारधारा को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होंगे।
इस मौके पर शत्रुघ्न सिन्हा ने नरेंद्र मोदी, अमित शाह पर हमला बाेलते हुए कहा कि बीजेपी में उन्होंने लोक शाही को धीरे-धीरे तानाशाही में परिवर्तित होते देखा है। मौजूदा बीजेपी नेतृत्व ने यशवंत सिन्हा, मुरली मनोहर जोशी, अरुण शौरी जैसे कद्दावर शख्सियतों को निपटा दिया गया है।
शत्रुघ्न सिन्हा जब पूछा गया कि आखिर बीजेपी सरकार में उन्हें मंत्री क्यों नहीं बनाया गया। इस पर उन्होंने कहा कि क्या उनके अंदर काबिलियत नहीं या फिर उनके अंदर क्या कमी थी। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि बीजेपी में इस वक्त तानाशाही रूप से सरकार चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ये वन मैन शो और टू मैन आर्मी की सरकार है। केंद्र के मंत्रियों को अपना सचिव रखने की भी इजाजत नहीं थीं।
इससे पहले शत्रुघ्न सिन्हा ने ट्वीट कर कहा था कि वे भारी मन और गहरी वेदना से सूचित कर रहे हैं कि उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी भाजपा को अलविदा कह दिया है, और इसका कारण हम सभी को पता है। शत्रुघ्न सिन्हा ने बताया कि बड़ा संयोग है कि आज ही भाजपा का स्थापना दिवस भी है।
भाजपा के खिलाफ बयानबाजी की वजह से उनकी सीट पटना साहिब से कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद काे उतार दिया था।
शत्रुघ्न सिन्हा संभवत: पटना साहिब सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वे पहले से ही कहते रहे हैं कि 'सिचुएशन जो भी हो, लोकेशन वही होगा। अभिनेता से राजनेता बने सिन्हा प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कामकाज के आलोचक रहे हैं और दोनों पर देश को तानाशाह की तरह चलाने का आरोप लगाते रहे हैं। वे देश के विभिन्नों हिस्सों में रैलियों को संबोधित करते रहे हैं। वे कहते रहे हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में लोकशाही थी, जबकि मोदी सरकार में 'तानाशाही' है।
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