जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 'फाइलों' का अपना बोझ हल्का किया है। दरअसल मुख्यमंत्री गहलोत प्रदेश के गृहमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं। गृह विभाग की जो फाइल गृहमंत्री के नाते मुख्यमंत्री के पास जाती थी, अब उनका रुट बदल दिया गया है।
फाइलों का रूट बदलने से बदलने से एसीएस गृह की पावर बढ़ गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से पिछले दिनों गृह विभाग के फाइलों के रूट को लेकर स्टैंडिंग आर्डर जारी किए गए हैं।
इस बात को यूं समझिए
- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास वित्त डीओपी, गृह सहित अनेक विभाग हैं।
- इन विभागों की महत्वपूर्ण मसलो की फाइल मुख्यमंत्री तक जाती है।
- इधर सरकारी प्रशासनिक मामलों में व्यस्त होने के कारण फाइलें रखी रहती हैं।
- ऐसे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गृह विभाग की फाइलों को लेकर स्टैंडिंग आर्डर जारी किए।
- 2 करोड रुपये तक की स्वीकृति ACS गृह जारी कर सकेंगे।
- पहले 1 करोड़ रुपये तक की स्वीकृति की थी पॉवर ACS को।
- पासा एक्ट में कलेक्टर की शक्तियां देने, डिटेन करने या छोड़ने का संपूर्ण अधिकार भी ACS को दिया।
- ओएस एक्ट, बम ब्लास्ट मामले की फाइल पर निर्णय की शक्ति दी।
- सेन के जमीन अधिग्रहण, रिवॉर्ड के मामले की फाइल एसीएस तक।
- हथियार लाइसेंस क्लेरिफिकेशन के फाइल भी अब एसीएस तक ही जाएगी।
- पहले इन तमाम मामलों में गृहमंत्री अर्थात मुख्यमंत्री तक जाती थी।
- नए स्टैंडिंग ऑर्डर के बाद फाइलों का निपटारा एसीएस गृह तक ही हो जाएगा।

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