रविवार, 10 मई 2020

राजस्थान: कोरोना से निपटने के लिए CM ने जनप्रतिनिधियों से शुरू किया संवाद

जयपुर। देशभर में कोरोना संक्रमण से निपटने की कवायद हो रही है। इसी बीच प्रदेश में भी लॉकडाउन के बाद की रणनीति पर चर्चा शुरू हो गई है। कोरोना से निपटने के लिए जनप्रतिनिधियों से भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संवाद किया है। 

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी विधायकों और सांसदों से इस संवाद की शुरूआत की है और उसकी पहल हुई उदयपुर संभाग से। इस दौरान कांग्रेस और बीजेपी के साथ ही बीटीपी और निर्दलीय विधायकों ने मुख्यमंत्री की अगुवाई में सरकार के काम की तारीफ़ की लेकिन नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को हर बात में केंद्र की आलोचना नहीं करने का सुझाव भी दिया। 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर जनप्रतिनिधियों से संवाद की पहल में सबसे पहले उदयपुर संभाग का नंबर आया। सबसे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जनप्रतिनिधियों के सुझावों का स्वागत किया तो उन्होंने सभी को अपनी बात कहने की छूट भी दी। कोरोना से लड़ने के लिए सरकार की तरफ़ से अभी तक की गई कोशिशों का ब्यौरा देते हुए सीएम अशोक गहलोत ने बताया कि किस तरह अभी तक सरकार ने जांच बढ़ाने का काम किया है और उसी से प्रदेश में हालात नियंत्रण में हो पाए हैं। 


प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचन्द कटारिया खुद उदयपुर संभाग से आते हैं। लिहाजा उदयपुर में कटारिया ने प्रदेश बीजेपी के साथ ही उदयपुर का प्रतिनिधित्व करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखी। कटारिया ने संवाद की इस पहल को सराहा। कटारिया ने सरकार के काम की कई मामलों में तारीफ़ तो की लेकिन साथ ही मुख्यमंत्री को यह सुझाव भी दिया कि हर बात में केंद्र सरकार की आलोचना करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली ने कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई में कुछ नहीं किया और कोई मदद नहीं दी। इस तरह की बात करना ठीक नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश की सीमा पर अटके प्रवासियों के मामले पर चिंता जताई तो कोरोना सेंटर्स पर बड़े डॉक्टर्स के नहीं जाने पर भी चिंता जताई।

कटारिया ने कहा कि जब बीजेपी का विधायक दल विधानसभा में कह चुका है कि प्रदेश के भले के लिए राजनीतिक से ऊपर उठकर सरकार का साथ देंगे तो हर बात में दिल्ली को कोसना ठीक नहीं। ऐसा होने पर उनकी पार्टी के लोगों को भी बोना पड़ता है। इस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कटारिया को कहा कि वे इस मुद्दे पर उनसे अलग से बात करेंगे। इस दौरान कटारिया ने डॉक्टर्स और पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले लोगों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज करने की पैरवी भी की।

नाथद्वारा से विधायक डॉ. सीपी जोशी ने भी रखी बात 

इस संवाद के दौरान विधानसभा अध्यक्ष और नाथद्वारा से विधायक डॉ. सीपी जोशी ने भी अपनी बात रखी। जोशी ने कहा कि सांसद और विधायकों को लोगों के मन से कोरोना का डर निकालना होगा। उन्होंने कहा कि अब हम लोगों को कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी होगी। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग अन्य राज्यों से राजस्थान आ रहे हैं। ऐसे में शहरी इलाकों को लेकर विशेष रणनीति बनानी होगी। 


प्रवासी श्रमिकों का मुद्दा भी उठाया गया

इस वीडियो कॉन्फ्रेंस में विधायक किरण माहेश्वरी ने भी प्रवासी श्रमिकों का मुद्दा उठाया। माहेश्वरी ने क्वारन्टाइन सेंटर के हालात सुधारने, लोगों तक कच्ची खाद्य सामग्री पहंचाने के साथ ही किसानों के गेंहू की खरीद में आ रही परेशानी के मुद्दे को उठाया। इसके साथ ही उदयपुर सांसद अर्जुनलाल मीणा ने डूंगरपुर कलेक्टर पर सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि डूंगरपुर कलेक्टर ने एक बार भी रतनपुर बॉर्डर जाकर वहां के हालात नहीं देखे। 

बीजेपी के कुछ जनप्रतिनिधियों ने कलक्टर्स पर बात नहीं सुनने के आरोप लगाए तो प्रतापगढ़ में कांग्रेस विधायक ने पुलिस अधीक्षक की कार्यशैली को लेकर मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखी। विधायकों ने कुछ जगह लोगों को गेंहू नहीं मिलने के साथ ही शराब की दुकानों से होने वाली आशंकाओं को लेकर अपनी बात रखी तो श्रमिकों के लिए पास व्यवस्था का सुझाव भी दिया। 

इस दौरान पाली से जुड़े सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने लॉकडाउन के बाद निर्माण काम शुरू करने और उसमें तेज़ी लाने को लेकर बात रखी। पीपी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस बारे में प्रधानमंत्री को भी सुझाव देना चाहिए कि काम जल्द शुरू किया जाए वरना तो एक साल इन श्रमिकों को लाने और ले जाने में ही खर्च हो जाएगा।

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