जयपुर। ब्यूरोक्रेसी में जयपुर कलेक्टर का पद हमेशा सरकार के आईने के तौर पर रहा हैं। इस पद पर नियुक्त अधिकारी की राजनीति पहुंच का अंदाजा नियुक्ति से होता हैं। लेकिन हाल में नियुक्त प्रमोटी आईएएस अंतर सिंह नेहरा को जयपुर कलक्टर की कुर्सी पर बैठने के लिए करीब दो घंटे इंतजार करना पड़ा।
निवर्तमान कलेक्टर जोगाराम पहले आबकारी विभाग अपने नए दफ्तर पहुंचे और पदभार ग्रहण किया। उसके बाद नए कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा को चार्ज देने जयपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे। दरअसल, बांसवाडा-बूंदी जिले की पांच-पांच महीने कलेक्ट्री कर चुके प्रमोटी आईएएस अंतर सिंह नेहरा ने 49वें कलक्टर के रूप में जयपुर कलेक्टर का पदभार संभाल लिया हैं। लेकिन कुर्सी पर बैठने के लिए नेहरा को करीब दो घंटे इंतजार करना पड़ा।
हालांकि, इस इंतजार के पीछे कलेक्ट्रेट के गलियारों में ये चर्चा हैं कि, कही ये प्रमोटी आईएएस और डायरेक्ट आईएएस की टसल तो नहीं हैं। क्योंकि इसी तरह का वाक्या 2018 में भी हो चुका हैं,जब 2003 बैच के आईएएस सिद्धार्थ महाजन ने प्रमोटी आईएएस (सेवानिवृत) जगरूप सिंह यादव को चार्ज सौंपा था। ठीक उसी तरह का वाक्या आज भी कलेक्ट्रेट में कलेक्टर चैंबर में देखने को मिला। जब 2005 बैच के डायरेक्टर आईएएस जोगाराम ने प्रमोटी आईएएस अंतर सिंह नेहरा को कलेक्टर को दो घंटे इंतजार करवाकर चार्ज सौंपा।
कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा सुबह 9.30 बजे ही कलेक्टर का चार्ज लेने के लिए जयपुर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। नेहरा को जयपुर कलेक्टर की कुर्सी पर बैठने का ब्रेसबी से इंतजार था। लेकिन निवर्तमान कलेक्टर जोगाराम पहले नए दफ्तर आबकारी विभाग पहुंचे और पदभार ग्रहण किया, उसके बाद जयपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर अंतर सिह नेहरा को चार्ज सौंपा. सुबह 9.30 बजे से कुर्सी पर बैठने का इंतजार कर रहे नेहरा के चेहरे पर करीब 11 बजे खुशी दिखाई दी, जब जोगाराम चार्ज देने पहुंचे।
कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा राजस्व की अच्छी जानकारी रखते हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पिछले और वर्तमान कार्यकाल में ज्वाइंट सेकेट्री के पद पर रह चुके हैं। अलग-अलग सरकारों में रेवन्यू मिनिस्टर के दो बार पीएस भी रह चुके हैं। अब तक का नेहरा का ट्रेक रिकॉर्ड अच्छा रहा हैं।
मुख्यमंत्री के विश्वसनीय अफसरों में नेहरा की गिनती होती हैं। कलेक्टर के पदभार संभालने के बाद नेहरा ने कहा कि, 30 साल का अनुभव का फायदा उन्हे जरूर मिलेगा। राजस्व के मामलों में किसी भी तरह की जिले में दिक्कत नहीं होगी।
बूंदी जिले में बहुत सख्ती के बाद भी सबसे लास्ट में प्रवासी कोरोना पॉजिटिव मिले। हालांकि, बूंदी बहुत छोटा जिला हैं और जयपुर से तुलना नहीं कर सकते। लेकिन बचाव ही उपाय हैं और लोगों के काम समय पर हो पीड़ितों को न्याय मिले। ये सबसे पहली प्राथमिकता रहेगी। सीनियर से मार्गदर्शन लेने की भी बात नेहरा ने कही।
दरअसल नेहरा 2018 में आरएएस से प्रमोट होकर आईएएस बने थे। जयपुर से पहले बूंदी और बांसवाडा कलेक्टर, मुख्यमंत्री के ज्वाइंट सेकेट्री, पीडब्ल्यूडी विभाग में भी रह चुके हैं। बतौर आरएएस नेहरा की पहली पोस्टिंग बीडीओ लाडनूं रही हैं। उसके बाद उन्होने बाडमेर में सीडीपीओ के साथ अलग-अलग जिलों में एसडीएम, एडीएम, सीईओ, आबकारी विभाग में अपनी सेवाएं दी हैं।
बहरहाल, नए कलेक्टर के सामने कोरोना का संक्रमण शहर में रोकना चुनौती है। जनभागीदारी और जनप्रतिनिधियों से तालमेल रखना उससे ज्यादा बड़ी चुनौती हैं। क्योंकि गलियारों में चर्चा हैं कि, कोविड-19 में तालमेल नहीं होने के चलते निवर्तमान कलेक्टर सात महीने में ही विधायकों की भेंट चढ़ गए।
कोविड-19 के साथ आगामी पंचायत चुनाव और जयपुर नगर निगम के चुनाव करना सबसे बड़ी चुनौती है। जयपुर जिले में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराना अंतर सिंह नेहरा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। क्योंकि जयपुर सबसे बड़ा जिला है।

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