रविवार, 5 जुलाई 2020

स्कूल खुलें या नहीं?

क्या कोरोना महामारी के बीच अब स्कूलों का नया सेशन शुरू कर देना चाहिए? केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने अगस्त में स्कूलों के खुलने की बात कही थी। लेकिन अभी तक बहुत सी राज्य सरकारें इसके लिए तैयार नहीं दिखतीं। गौरतलब है कि मार्च में लॉकडाउन शुरु होते ही सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया था। उस कारण 10वीं और 12वीं की बोर्ड समेत कई परीक्षाएं टल गई थीं। हालत यह है कि अभी कोविड संक्रमित लोगों का आंकड़ा देश में लगातार बढ़ता ही जा रहा है, हालांकि देश इस वक्त लॉकडाउन हटा कर अनलॉक के दौर में हैं। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने स्कूलों को खोलने को लेकर गाइडलाइन जारी की। उसमें सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन जैसी चीजों को लेकर कुछ नियम शामिल हैं। साथ ही स्कूलों में सिर्फ 30-40 फीसदी की स्ट्रेंथ रखने की भी बात की गई है। कुछ शहरों में चरणों में स्कूलों को खोलने की बात हो रही है। मगर क्या ऐसा करना व्यावहारिक होगा? भारत में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की तादाद लगभग 33 करोड़ है।

भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 20 फीसदी हिस्सा 6-14 की उम्र के बीच के बच्चे हैं, जो आरटीई क नून के तहत कानूनी रूप से शिक्षा के हकदार हैं। दरअसल, कई परिवारों के लिए स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं हैं। बल्कि अनेक सरकारी स्कूल बच्चों को खाना खिलाते हैं। यानी बच्चों तक सरकारी सुविधाओं के पहुंचने का ये माध्यम हैं। स्कूल बंद होने के दौरान लगभग 9 करोड़ भारतीय बच्चों को उनका मिड-डे मील नहीं मिल रहा है। मिड डे मील ना सिर्फ बच्चों को सही पोषक खाना मुहैया कराता है। साथ ही ये गरीब परिवारों के बड़े खर्चे को भी कम करता है। एक और समस्या यह है कि कोरोना वायरस की वजह से लंबे वक्त तक ऑनलाइन स्कूलिंग चल रही है। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई पर तो असर पड़ ही रहा है, साथ ही बच्चों की आदतों में बड़े बदलाव आने लगे हैं। इंटरनेट के जरिए पढ़ाई की अपनी मुसीबतें हैं। देश में हर शहर और गांव में ना तो तेज इंटरनेट की गारंटी है, ना ही सभी घरों में स्मार्टफोन और कंप्यूटर हैं। केरल सरकार ने लॉकडाउन के बीच इंटरनेट को मूल अधिकार का दर्जा दिया है। लेकिन जैसे-जैसे पढ़ाई के लिए इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ती है वैसे ही कई गरीब परिवारों को ये स्कूलों से दूर करेगा। मगर इन समस्याओं का हल क्या है, इस बारे में किसी के पास कोई निश्चित राय नहीं है। 

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