नरेंद्र मोदी सरकार में फेरबदल टलने का सबसे मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का विभाग बदला जाएगा। चूंकि वे बजट तैयार कर रही थीं और उन्हें बजट पेश करके उसे पास कराने से पहले नहीं हटाया जा सकता था इसलिए मंत्रिमंडल में फेरबदल टली है। भाजपा के जानकार नेताओं के मुताबिक निर्मला सीतारमण का यह आखिरी बजट है। उन्होंने अपना पहला बजट पिछले साल जुलाई में पेश किया और तब उन्होंने दो घंटे 17 मिनट तक बजट भाषण पढ़ कर रिकार्ड बनाया था। इस बार उन्होंने दो घंटे 41 मिनट का भाषण पढ़ कर अपना ही रिकार्ड तोड़ा है। इसके बावजूद बजट के दो पन्ने नहीं पढ़े जा सके। उससे पहले ही उनकी तबियत बिगड़ गई।
हालांकि बतौर वित्त मंत्री काम करने का उनके पास ज्यादा स्कोप नहीं था। देश की अर्थव्यवस्था जिस हालत में है उसके लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं। पिछले पांच साल के कार्यकाल में नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों से अर्थव्यवस्था की गाड़ी पटरी से उतरी हुई है। उनको इसे पटरी पर लाने की जिम्मेदारी थी पर उनके पास विकल्प बहुत कम था। दूसरे, खुद प्रधानमंत्री की टीम आर्थिक फैसलों से सीधे जुड़ी थी। यह भी कहा जा रहा है कि जुलाई में पहला बजट पेश करने के बाद उन्होंने तीन मिनी बजट पेश किए।
ध्यान रहे पिछले साल के आखिर में अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए वित्त मंत्री ने तीन बार प्रेस कांफ्रेंस करके कई बड़े कदमों का ऐलान किया। यह सब कुछ बिल्कुल नया और अनोखा था। अब माना जा रहा है कि पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय में लाकर प्रधानमंत्री इसे ज्यादा पेशेवर तरीके से चलाना चाह रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व प्रमुख केवी कामथ को भी वित्त मंत्रालय में लाया जा सकता है।

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