शुक्रवार, 1 मार्च 2019

जवानों की सेवानिवृत्ति विसंगति दूर करने के लिए डेटा विश्लेषण करें

गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के जवानों की सेवानिवृत्ति आयु की विसंगतियों को दूर करने के लिए डेटा विश्लेषण के निर्देश दिए है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने जवानों की सेवानिवृत्ति आयु 57 से बढ़ाकर 60 वर्ष करने का आदेश दिया था।

एक अधिकारी के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुखों से कहा है कि अपने बलों के जवानों की सेवानिवृत्ति उम्र 57 साल से बढ़ाकर 60 साल किए जाने के बाद एक डेटा विश्लेषण की कवायद करें और अपनी लड़ाकू इकाइयों के आयु प्रोफ़ाइल (एज-प्रोफाइल) से जुड़े ‘दीर्घकालिक’ मुद्दों का आकलन करें।

उल्लेखीय है दिल्ली हाई कोर्ट ने मौजूदा विसंगति को दूर करने के लिए जवानों की सेवानिवृत्ति आयु 57 से बढ़ाकर 60 वर्ष करने के आदेश दिए थे। अदालत के आदेश के मद्देनजर 27 फरवरी को इस विषय पर एक बैठक बुलाई गई। आदेश में कहा गया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) में जवानों की सेवानिवृत्ति की उम्र अलग-अलग है जो ‘भेदभावकारी एवं असंवैधानिक’ है और इससे इन वर्दीधारी बलों में दो वर्ग पैदा हो गए हैं।

बैठक में हुई चर्चा से अवगत एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बात पर भी मंथन हुआ कि इन बलों के सभी कर्मियों की सेवानिवृत्ति उम्र जब सीआईएसएफ एवं असम राइफल्स के कर्मियों की तरह 60 वर्ष हो जाएगी तो उसके क्या-क्या नतीजे हो सकते हैं। गृह मंत्रालय ने इन बलों के महानिदेशकों से कहा है कि वे एक डेटा विश्लेषण करें और मंत्रालय को अगले हफ्ते तक सूचना दें। इस बाबत अगली बैठक छह मार्च को बुलाई गई है।

मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सीएपीएफ प्रमुखों को प्रस्तावित फैसले का ‘भविष्य’ में होने वाली भर्तियों, सीमा सुरक्षा के कार्यों में तैनात जवानों की आयु प्रोफाइल और इन पुरुष एवं महिला कर्मियों की एनएसजी, एसपीजी और एनडीआरएफ जैसे बलों में प्रतिनियुक्ति पर पड़ने वाले असर का आकलन करना चाहिए।




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