शनिवार, 7 सितंबर 2019

आरबीआई की आंख खोलने वाली रिपोर्ट

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले दिनों अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की। ध्यान रहे सरकार ने रिजर्व बैंक में शक्तिकांत दास को गवर्नर बना कर बैठाया है और वे लगभग सरकार के मनमाफिक फैसले कर रहे हैं। रिजर्व बैंक में जो काम रघुराम राजन ने नहीं किया वह उर्जित पटेल ने किया और जो उर्जित पटेल भी नहीं कर पाए वह शक्तिकांत दास ने किया। इससे उनकी निष्ठा का अंदाजा लगाया जा सकता है। फिर भी उन्होंने अपनी सालाना रिपोर्ट में ऐसी अनेक बातें कहीं, जिनसे देश की अर्थव्यवस्था की हकीकत जाहिर होती है। इस रिपोर्ट से नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी नोटबंदी की योजना की पोल भी खुलती है। 

आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नोटबंदी के तीन साल पूरे होने से पहले भारत में चलन में मौजूद नकदी 21 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई है। नोटबंदी के समय यह 18  लाख करोड़ के करीब थी, जिसमें से 15.44 लाख करोड़ रुपए के पांच सौ और एक हजार के नोट थे। आरबीआई पहले ही बता चुकी है 15.44 लाख करोड़ में से 15.28 करोड़ मूल्य के पांच सौ और एक हजार के नोट वापस लौट गए थे। बहरहाल, अब 21 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा नकदी बाजार में होने का मतलब है कि न नोटबंदी का मकसद पूरा नहीं हुआ है और न कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में कोई खास सफलता मिली है। 

रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में ना ना करते आर्थिक विकास दर का अनुमान भी घटा दिया। इस रिपोर्ट में आऱबीआई ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 6.9 रह सकती है। यकीन मानिए इसमें और कमी होगी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर पांच फीसदी पर आ गई है। अगली तिमाही में भी सुधार की गुंजाइश नहीं दिख रही है। इसलिए पूरे साल की विकास दर अब छह फीसदी तक पहुंचाने में ही मुश्किल होगी। आरबीआई की रिपोर्ट से यह भी जाहिर हुआ है कि नोटबंदी के बाद से कर वसूली में भी कमी आई है या कर वसूली जिस दर से बढ़ रही थी उसमें कमी आई है। आरबीआई की सालाना रिपोर्ट आने के तुरंत बाद अगस्त महीने के जीएसटी संग्रह की रिपोर्ट आई। पता चला कि अगस्त में फिर जीएसटी की वसूली का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपए से नीचे आ गया। अगस्त में 98 हजार करोड़ रुपए की जीएसटी वसूली हुई। आरबीआई की रिपोर्ट से यह भी पता चला कि उसकी अपनी बैलेंसशीट की वृद्धि भी पहले से कम हो गई है। 

नोटबंदी का एक बड़ा मकसद यह बताया गया था कि इससे नक्सलवाद और आतंकवाद को खत्म किया जा सकेगा। उसके करीब तीन साल बाद पिछले दिनों अनुच्छेद 370 को खत्म करने के समय भी कहा गया कि इससे कश्मीर में आतंकवाद खत्म करने में मदद मिलेगी। बहरहाल, इसके साथ साथ नोटबंदी से जाली नोट खत्म होने का दावा किया गया था। पर रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें बढ़ोतरी हो गई है। पांच सौ और दो हजार रुपए के नकली नोटों का चलन बढ़ा है। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में 3.17 लाख नकली नोट पकड़े गए हैं। दो हजार रुपए के नकली नोट के चलन में 22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है तो पांच सौ रुपए के नकली नोट के चलन में 121 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 

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