अगले एक साल में पूरे विश्व में सबसे खतरनाक वैश्विक मंदी आ सकती है। यह मंदी 2008 वाली से ज्यादा बड़ी होगी, जिसकी शुरुआत होने की कई जगह से आहट मिलनी शुरू हो गई है।
वैश्विक जीडीपी में 20 बीपीएस की कटौती
मॉर्गन स्टेनली ने मंदी की आहट को देखते हुए वैश्विक जीडीपी में 20 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है। एजेंसी ने 2019 के लिए तीन फीसदी और 2020 के लिए विकास दर को 3.2 फीसदी रखा है। अगर अमेरिका-चीन का ट्रेड वॉर चलता रहा, तो आने वाले समय में इसके भयंकर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इसकी चपेट में कई देश आ सकते हैं।
पिछले तीन महीनों में सिंगापुर की विकास दर केवल 3.4 फीसदी रह गई, जो कि 2012 के बाद के सबसे निचले स्तर पर है। वहीं चीन का आयात भी पिछले साल के मुकाबले 1.3 फीसदी घट गया है। निर्यात डाटा में भी 7.3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था भी इस साल के पहली तिमाही में काफी घट गई थी। अर्जेंटीना में महंगाई दर 22 फीसदी तक पहुंच गई है और लोग गरीबी से परेशान हैं। जून में समाप्त वर्ष में ऑस्ट्रेलिया की जीडीपी वृद्धि दर महज 1.4 फीसदी पर रही। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के आकड़ों के अनुसार, साल 2019 और 2020 में पाकिस्तान की जीडीपी में बढ़त दर तीन फीसद से भी कम रह जाएगी।
अर्जेंटीना की जनता का हाल-बेहाल
एक समय में अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था लैटिन अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। लेकिन आज अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था बेहद खराब दौर में है। बदहाली के दौर से गुजर रहे अर्जेंटीना में महंगाई दर 22 फीसदी तक पहुंच गई है और लोग गरीबी से परेशान हैं।
कम हो रही है अर्जेंटीना की मुद्रा की वैल्यू
अर्जेंटीना की मुद्रा पेसो की वैल्यू भी लगातार कम होती जा रही है। अर्जेंटीना में स्थानीय मुद्रा की वैल्यू कम होने की स्थिति में लोग डॉलर खरीदने लगते हैं। ऐसे में पैसे की वैल्यू और गिर जाती है। इसलिए सेंट्रल बैंक ने एक नया नियम भी बनाया है। नियम के अनुसार, अगर अर्जेंटीना के लोग सात लाख रुपये (10 हजार डॉलर) से ज्यादा की खरीद करना चाहते हैं, तो उन्हें सरकार से अनुमति लेनी होगी। इतना ही नहीं, डॉलर खरीदने के अतिरिक्त फंड बाहर भेजने से पहले भी सरकार की अनुमति की आवश्यकता होगी। ये नियम वहां की कंपनियों पर भी लागू होते हैं।
ऐसा है अर्जेंटीना के बाजार का हाल
12 अगस्त को अर्जेंटीना का शेयर बाजार एक दिन में 48 फीसदी टूटा था। खास बात ये है कि यह गिरावट किसी एक देश के शेयर बाजार में 1950 के बाद से अब तक की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। 12 अगस्त को ही अर्जेंटीना की मुद्रा पेसो की वैल्यू 30 फीसदी कम हो गई थी। उनकी मुद्रा की वैल्यू का अनुमान आप इस बात से लगा सकते हैं कि साल 2016 में जहां एक डॉलर के लिए 10 पेसो देने पड़ते थे। वहीं अब एक डॉलर के लिए 60 पेसो देने पड़ते हैं। आगामी वर्षों में इसमें और भी गिरावट आने की आशंका है।
देश की एक तिहाई आबादी गरीब
तमाम कोशिशों के बावजूद वहां की सरकार महंगाई कम नहीं कर पाई। खर्च कम करने और कर्ज कम लेने के जिन आर्थिक सुधारों का वादा किया गया था, वे लागू नहीं हो सके। बढ़ती महंगाई और सर्वजनिक खर्च में कटौती की वजह से आमदनी कीमतों की तुलना में नहीं बढ़ी। जिसकी वजह से अधिकतर लोग गरीब हो गए। देश की एक तिहाई आबादी अब गरीबी में रह रही है।
एक दशक के निचले स्तर पर ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर
ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था की वार्षिक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर पर आ गयी है। आंकड़ों के मुताबिक जून में समाप्त वर्ष में ऑस्ट्रेलिया की जीडीपी वृद्धि दर महज 1.4 फीसदी पर रही।
ऑस्ट्रेलिया एक जुलाई से अगले साल के 30 जून तक के समय को एक वित्त वर्ष मानता है। ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार महज 0.40 फीसदी रही।
ऑस्ट्रेलिया में चिंता की स्थिति
ऑस्ट्रेलिया करीब 28 साल से मंदी को टालने में कामयाब रहा है लेकिन आंकड़ों से देश के आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंता की स्थिति पैदा हो गयी है।
आश्वस्त हैं प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिशन
हालांकि, प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिशन इस बात को लेकर आश्वस्त दिखे कि देश मंदी के इस दौर से बाहर निकलने में कामयाब रहेगा। स्थानीय रेडियो से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि हाल में कर दर में की गयी कटौती से चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था को नयी मजबूती मिलेगी।
सिंगापुर का घट गया निर्यात
सिंगापुर की अर्थव्यवस्था में निर्यात का काफी महत्वपूर्ण स्थान है। यह कुल जीडीपी का 176 फीसदी है। पिछले कुछ महीनों से यह काफी कम हो गया है और 2013 के स्तर पर पहुंच गया है। सिंगापुर के वित्त मंत्री हेंग स्वी कीट ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि सरकार ने इस बार जीडीपी के 1.5 फीसदी से 2.5 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है। सरकार पूरे मामले पर गंभीरता से नजर रखे हुए है।
26 साल के निचले स्तर पर चीन की विकास दर
चीन इंटरनेशनल कैपिटल कॉर्प (सीआईसीसी) के आंकड़ों के मुताबिक चीन में जुलाई 2018 से मई 2019 के बीच मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ट्रेड वॉर के चलते 19 लाख नौकरियां चली गई हैं।
ट्रेड वॉर के बीच चीन में विनिर्माण मांग घटी
अमेरिका से चल रही ट्रेड वॉर के बीच चीन के विनिर्माण क्षेत्र में मांग घटी है। दो सर्वेक्षणों में यह तथ्य उजागर हुआ है। कारोबार पत्रिका काइजिन का कहना है कि नए ऑर्डरों की तादाद इस साल के सबसे निचले स्तर पर है।
अमेरिका में टैरिफ में हुई बढ़ोतरी के चलते चीनी निर्यातकों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चीन के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है और उसे होने वाला निर्यात इस साल जुलाई में 6.5 फीसदी के स्तर पर आ गया। जून में खत्म हुई तिमाही में चीन की विकास दर 6.2 फीसदी रही, जो पिछले 26 साल में सबसे निचले स्तर पर है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरा
विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तकरार के कारण वैश्विक आर्थिक मंदी उपजने के संकेतों के बावजूद चीन और अमेरिका के बीच चल रहा ट्रेड वॉर खत्म होता नहीं दिखाई दे रहा है। चीन पर नए व्यापार समझौते के लिए दबाव बनाने की कवायद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसके उत्पादों के आयात पर 15 फीसदी शुल्क बढ़ा दिया है।
अमेरिकी उपभोक्ताओं को भारी पड़ रहा ट्रेड वॉर
चीन और अमेरिका के बीच चल रहा ट्रेड वॉर खुद अमेरिकी नागरिकों को बेहद भारी पड़ रहा है। करीब एक साल से ज्यादा समय से चल रही ट्रेड वॉर के कारण हो रही शुल्क बढ़ोतरी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि यह बोझ चीनी कंपनियों को उठाना पड़ रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका खामियाजा अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं को ज्यादा उठाना पड़ा है।
अमेरिकी घरों का रहन-सहन महंगा
जेपी मोर्गन के एक अध्ययन के मुताबिक, ट्रेड वॉर के कारण अमेरिकी घरों का खर्च औसतन 1000 डॉलर सालाना बढ़ गया है। यह अध्ययन ट्रंप की तरफ से एक सितंबर को और 15 दिसंबर को 15-15 फीसदी शुल्क और बढ़ाने के ऐलान से पहले की गया था। इसका मतलब है कि शुल्क बढ़ोतरी से अमेरिकी घरों का रहन-सहन और ज्यादा महंगा हो जाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें